Bihar Board Exam Questions Answer मैट्रिक परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर तैयारी के लिए।।

Bihar Board Exam Questions Answer मैट्रिक परीक्षा महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर तैयारी के लिए।।

(1) छात्र और अनुशासन-सृष्टि के रचयिता ने जिस सृष्टि की रचना की है, वह इतनी नियमपूर्वक चलती है कि उसके एक-एक क्षण का परिवर्तन निश्चित समय पर होता है। सूर्य और चंद्रमा का चमकना, दिन और रात का होना, पेड़-पौधों पर फल-फूल लगना आदि। ये सब कार्य इतने नियमित और निश्चित समय पर होते हैं। जिन्हें देखकर आश्चर्य होता है। सृष्टि का समस्त कार्य एक निश्चित नियंत्रण या ‘अनुशासन’ के अधीन चल रहा है। अनुशासन शब्द का अर्थ ही शासन (आदेश या नियंत्रण) के अनुसार चलना है। अनुशासन एक व्यापक तत्त्व है, जो जीवन के सभी क्षेत्रों को अपने में समा लेता है। इसके अभाव में जीवन व्यवस्थित रीति से नहीं चल सकता।

अनुशासन के दो रूप हैं-बाह्य और आंतरिक । शास्त्रीय, सामाजिक तथा शासकीय नियमों का पालन करना, गुरुजनों के उपदेश और आदेश को मानना बाह्य अनुशासन है। मन की समस्त वृत्तियों पर और इन्द्रियों पर नियंत्रण आंतरिक अनुशासन है। यह अनुशासन का श्रेष्ठ रूप है। ठीक इसी प्रकार जब मनुष्य नियंत्रित जीवन व्यतीत करता है तो दूसरों के लिए आदर्श व अनुकरणीय बन जाता है। यद्यपि जीवन में पग-पग पर अनुशासन का बड़ा भारी महत्त्व है, तथापि विद्यार्थी जीवन में इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। विद्यार्थी को अपने भावी जीवन के निर्माण की तैयारी करनी होती है, जो बड़ी कठोर साधना है। इसके लिए विद्यार्थी का अनुशासित जीवन व्यतीत करना अनिवार्य है। अनुशासन में रहने वाला बालक ही देश का सभ्य नागरिक बन सकता है और वही स्वयं को अपने परिवार को तथा स्वदेश को उन्नत बनाने में सहयोग दे सकता है।

भारत को प्राचीन ऋषिों और आचार्यों ने जीवन को चार भागों में बाँटा था और इनमें से प्रथम ब्रह्मचर्य आश्रम को जीवन का मूल आधार माना था । इसमें विद्यार्थी भावी जीवन के निर्माण के लिए कठोर साधना करता था। गुरु का अपना चरित्र बड़ा ही प्रभावशाली और अनुकरणीय होता था। विद्यार्थी उसकी संरक्षण में रहकर पूर्ण अनुशासन से जीवन व्यतीत करना सीखता था। उसका अपने आहार-विहार, परिधान, निद्रा आदि सब पर पूर्ण नियंत्रण रहता था। बालक के मान रूपी हीरे को साधना मंत्र द्वारा तराशा और चमकाया जाता था, ताकि बड़ा होकर वह समाज को प्रकाश दे सके, उसे उचित मार्ग पर ले जा सके। यही कारण था कि उस समय का विद्यार्थी सच्चरित्रा, गुरु में अटूट श्रद्धा रखने वाला और बड़ों की आज्ञा का पालन करने वाला होता था और अपने भावी जीवन में राष्ट्र की उन्नति में महत्त्वपूर्ण योगदान देता था ।

आज समाज का जब चारों ओर से घोर नैतिक पतन हो रहा है, उसमें भ्रष्टाचार का बोलबाला है। ऐसी दशा में आंतरिक अनुशासन और व्यवस्था की कल्पना तभी साकार हो सकेगी, जब हमारे हृदय में परिवर्तन हो और हृदय परिवर्तन का श्रेष्ठ समय विद्यार्थी जीवन है। विद्यार्थी का मान एक सुंदर पुष्प है, जिसे साधना रूपी धूप और विचार रूपी जल देकर पूर्ण विकसित करना होता है, ताकि उसकी सुगंध से सारा समाज सुगंधित हो जाय । यदि यह पुष्प अनुशासनहीनता के दलदल में पड़ गया तो निश्चित ही इसकी दुर्गंध से सब परेशान हो उठेंगे।

2. प्रिय शिवम्

मुसल्लहपुर, कोइरी टोला,

पटना 10 सितम्बर, 2016 नमस्कार ! मैं यहाँ सकुशल हूँ। आशा करता हूँ तुम भी सकुशल होंगे। मैं पिछले सप्ताह राजगीर (बिहार) गया था। यह बड़ा ही रमणीय पर्यटन स्थल है। यहाँ गर्म कुंड में सल्फर युक्त पानी गिरता है। जाड़े में स्नान करने में बड़ा ही मजा आता है। रज्जू मार्ग से कुर्सियाँ पर बैठकर आसमान में जाने में बड़ा आनंद आता है। पहाड़ के ऊपर बुद्ध भगवान की स्वर्णिम मूर्तियाँ हैं। पूजा-पाठ भी चलता रहता है। बुद्ध ने जीवन में मध्यम मार्ग से चलने की प्रेरणा दी थी।

मित्रों के साथ आनंद में और भी वृद्धि हो जाती है। राजगीर में सरकारी पर्यटन ठहराव भवन में भोजन का बड़ा बढ़िया इंतजाम था। यात्रा रोमांचक रही। तुम भी राजगीर जरूर घूम लेना।

2. अथवा, देखें, 2011 प्रश्न संख्या 6 का उत्तर 3. शीर्षक – पुरुषार्थ से भाग्य का निर्माण।

सभी सुखों तथा आनंद का द्वार पुरुषार्थ है। मानव परिश्रम की मदद से सभी इच्छाओं की पूर्ति कर चिंता मुक्त जीवन का निर्माण कर सकता है। कड़ी मेहनत से भाग्य का निर्माण कर स्वावलम्बी जीवन के द्वारा मानव अपना कल्याण कर सकता है।

4. देखें, वर्ष 2011, प्रश्न संख्या 8 का उत्तर अथवा, देखें वर्ष 2016, प्रश्न संख्या 9 का उत्तर अथवा, देखें, वर्ष 2009, प्रश्न संख्या 1 (अथवा) का उत्तर या देखें, वर्ष 2010, प्रश्न संख्या 8 (अथवा ) का उत्तर 5. (क) देखें, वर्ष 2011, प्रश्न संख्या 9 (क) का उत्तरः अथवा, देखें, वर्ष 2010, प्रश्न संख्या 2 (अथवा) का उत्तर (ख) देखें, वर्ष 2018, प्रश्न संख्या 5 (ख) अथवा का उत्तर

5. अथवा, ‘अधिनायक’ शीर्षक कविता के रचयिता रघुवीर सहाय है वे हिंदी के प्रसिद्ध कवि एवं पत्रकार है। ‘अधिनायक’ एक व्यंग्य कविता है । “ऐसी व्यंग्य कविता जिसमें हास्य नहीं, आजादी के बाद के सत्ताधारी वर्ग के प्रति रोषपूर्ण तिक्त कटाक्ष है। राष्ट्रीय गायन में निहित ‘अधिनायक’ शब्द को लेकर यह व्यंग्यात्मक कटाक्ष है। आजादी हासिल होने के इतने वर्षों के बाद भी आम आदमी की हालत में कोई बदलाव नहीं आया। कविता में ‘हरचरना’ इसी आदमी का प्रतिनिधि है। वह एक स्कूल जाने वाला बदहाल गरीब लड़का है जो अपनी आर्थिक-सामाजिक हालत के विपरीत औपचारिकतावश सरकारी स्कूल में पढ़ता है। राष्ट्रीय त्योहार के दिन झंडा फहराए जाने के जलसे में वह ‘फटामुधन्ना’ पहने वही राष्ट्रगान दुहराता है जिसमें इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी न जाने किस ‘अधिनायक’ का गुणगान किया गया है। सत्ताधारी बदले हुए जनतांत्रिक संविधान से चलती इस व्यवस्था में भी राजसी ठाठ-बाट वाले भड़कीले रोब-दाब के साथ इस जलसे में शिरकत अपना गुणगान अधिनायक के रूप में करवाए जा रहा है। कविता में निहितार्थ ध्वनि यह है मानो इस धारी वर्ग की प्रछन्न लालसा हो सचमुच अधिनायक अर्थात् तानाशाह बनने की।” राष्ट्रगीत में भला कौन वह भारत के भाग्य का विधाता है। हरचरना नामक बालक फटे-चिथड़े ढंग की ढीली-ढाली हाफ पैंट पहने उस गान का गुण गाता है। झंडा फहराने के बाद मखमल, टमटम, बल्लम, तुरही, छतरी और चँवर के साथ तोपों की सलामी लेता है ? ढोल बजाकर जय-जय कौन कराता है ? पूरब पश्चिम से नंगे बूचे नरकंकाल आते हैं। सिंहासन पर बैठकर उरका तमगे मेडल कौन लगाता है ?

कौन इस जण-गण-मन का अधिनायक है ? कौन तानाशाह है ? कौन अपने को महाबली कहता उसका बाजा डरकर, मन सेया बेमन से रोज बाजाता है।

यह कौन भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश का नया तानाशाह बनना चाहता है। 6. (i) (घ), (ii) (ख), (iii) (क), (iv) (ग), (v) (ग) 7. (i) जायसी (iv) अशोक वाजपेयी 8. (i) देवता

(i) जे. कृष्णमूर्ति (iii) शमशेर बहादुर सिंह (v) ओम प्रकाश वाल्मीकि

(ii) समन्वयवादी

(iii) कुड़माई

(iv) झुंड 9. (क) देखें, वर्ष 2009, प्रश्न संख्या 6 (ख) का उत्तर

(v) खिलौना

अथवा, देखें, वर्ष 2010 प्रश्न संख्या 7 (ख) का उत्तर

9. (ख) देखें, वर्ष 2010 प्रश्न संख्या 7 (क) का उत्तर अथवा, ‘उसने कहा था’ कहानी का नायक लहना सिंह का सूबेदरनी के प्रति प्रेम अत्यन्त दिव्य प्रेम था। बचपन का प्रेम दिव्य प्रेम में विकसित हुआ । सूबेदारनी के पति एवं पुत्र की रक्षा युद्ध में की। लहना सिंह का प्रेम बलिदानी प्रेम है।

प्रश्न –

(i) संसार में किस प्रकार के मनुष्य की पूजा होती है?

(ii) किनकी प्रतिष्ठा कम हुई है?

(iii) कैसे व्यक्ति की समाज उपासना करता है?

(iv) संसार में धन के पुजारियों की क्या गति होती है?

(v) इस गद्यांश का उचित शीर्षक दें।

उत्तर- 

(i) जिन लोगों ने कुछ ऐसे काम किए, जिनकी महत्ता हम रुपये से अधिक मूल्यवान समझते हैं जो स्वार्थ की उपासना करना नहीं जानते या जिन्होंने अपने जीवन को अर्पित करते समय सच्चे मनुष्यत्व का परिचय दिया है, संसार में वैसे ही मनुष्य की पूजा होती है।

(ii) जिन लोगों के जीवन का उद्देश्य केवल रुपया बटोरना है, उनकी प्रतिष्ठा कम हुई है।

(iii) जिन लोगों ने कुछ ऐसे काम किए जिनकी महत्ता हम रुपए से अधिक मूल्यवान समझते हैं, जिनके जीवन का उद्देश्य सिर्फ पैसा बटोरना नहीं है, जो स्वार्थ से रहित होकर मनुष्यत्व का परिचय देता है, समाज वैसे व्यक्ति की उपासना करता है।

(iv) संसार में धन के पुजारियों की समाज में प्रतिष्ठा कम हुई है। अधिकांश अवस्थाओं में उन्हें कोई पूछता नहीं। जन्म लिया रुपया कमाया और परलोक की यात्रा की। किसी ने जाना तक नहीं कि वे कौन थे और कहाँ गए। उनकी यही गति होती है।

(v) धन की गति।

प्रश्न – 

(i) हमारे देश भारत में हरित क्रांति का उद्देश्य क्या था?

(ii) खाद्यान्नों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किनका प्रयोग सही नहीं था?

(iii) विशेषज्ञ हरित क्रांति की सफलता के लिए क्या आवश्यक मानने लगे और क्यों?

(iv) हरित क्रांति ने किसानों को परम्परागत कृषि से किस तरह दूर कर दिया ?

(v) जैविक खाद का मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर क्या असर पड़ता है?

उत्तर — 

(i) हमारे देश भारत में हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य देश को खाद्यान्न मामले में आत्मनिर्भर बनाना था।

(ii) विशेषज्ञों के मुताबिक खाद्यान्नों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग सही नहीं था।

(iii) विशेषज्ञ हरित क्रांति की सफलता के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग आवश्यक मानने लगे क्योंकि जिस रफ्तार से देश की आबादी बढ़ रही है, उसके मद्देनजर फसलों की अधिक पैदावार जरूरी थी।

(iv) दो दशक पहले तक हर किसान के यहाँ गाय, बैल और भैंस खूटों से बंधे मिलते थे लेकिन हरित क्रांति के बाद इन मवेशियों की “जगह ट्रैक्टर-ट्रॉली ने ले ली। परिणामस्वरूप गोबर और घूरे की राख से बनी कंपोस्ट खाद खेतों में गिरनी बंद हो गई। हरित क्रांति में अधिक पैदावार के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग अधिक होने लगा। इस तरह हरित क्रांति ने किसानों को परम्परागत कृषि से दूर कर दिया।

(v) जैविक खाद से खेतों के मिट्टी की उर्वरा शक्ति बरकरार रहती है बल्कि इससे किसानों को आर्थिक लाभ के अलावा बेहतर गुणवत्ता वाली फसल भी मिलती है।

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