Matric Exam 2024 Question मैट्रिक परीक्षा महत्पूर्ण प्रश्न उत्तर तैयारी के लिए।।

Matric Exam 2024 Question मैट्रिक परीक्षा महत्पूर्ण प्रश्न उत्तर तैयारी के लिए।।

Q1. वाणी कब विष के समान हो जाती है?

उत्तर :- जब कोई व्यक्ति ईश्वर की अराधना नहीं करता है तब उनकी बुद्धि मारी जाती है। उनका की अर खान-पान बिगड़ जाता है। व्यवहार बदल जाता है और वाणी विष के समान हो जाती है।

Q2. कवि किसके बिना जगत् में यह जन्म व्यर्थ मानता है?

उत्तर :- कवि गुरुनानक राम नाम के बिना इस जगत् में जन्म लेना व्यर्थ मानते हैं। उनका मानना है कि ईश्वर का मन से अराधना करने पर ही मनुष्य का जीवन सार्थक होता है। राम नाम के बिना व्यक्ति विष खाता है और विष ही बोलता है क्योंकि उसका जीवन असफल हो जाता है।

Q3. नाम कीर्तन के आगे कवि किन कारणों की व्यर्थता सिद्ध करता है?

उत्तर :- नाम कीर्तन के आगे कवि पूजा, पाठ, व्यकरण आदि बखान करना बेकार मानते हैं। व्यर्थ दिखावा करना झूठा है। वास्तविकता तो यह है कि मनुष्य को सच्ची दिल से हरि नाम का कीर्तन करना चाहिए।

Q4. हरिरस से कवि का अभिप्राय क्या है?”

उत्तर :- हरिरस का मतलब ईश्वर आनंद से है, जो व्यक्ति सच्चे हृदय से ईश्वर की अराधना करते हैं उन्हें हरिरस की प्राप्ति होती है। सच्चे आनंद की अनुभूति होती है। जिसे चौर–घोरकर भक्तगण पीते हैं, जो उन्हें ज्ञान प्रदान करता है ।

Q5. कवि की दृष्टि में ब्रह्म का निवास कहाँ है?

उत्तर :- कवि गुरुनानक की दृष्टि में ब्रहम का निवास कण-कण में है। हरेक जीव आत्मा में परमात्मा का निवास होता है। उनके बिना इस संसार में कोई स्थान नहीं है। वे निरंकारी रूप में सर्वव्यापी है। उन्हें खोजने की कोई आवश्यकता नहीं है।

Q6. कवि ने माली-मालिन किन्हें और क्यों कहा है?

उतर :- रसखान अपने कविता प्रेम’ अयनि श्री राधिका’ में श्री कृष्ण को माली एवं राधिका को मालिन कहा है, क्योंक ये राधा और कृष्ण दोनों गाली-मालिन की तरह अपने प्रेम रूपी बगिया को संवारा है, विकसित किया है।

Q7. कृष्ण को चोर क्यों कहा गया है?- कवि अभिप्राय स्पष्ट करें।

उत्तर :- कृष्ण का रूप अत्यंत मनोहारी और मोहनी है जब राधा उनके मोहनी चेहरे को देख लेती है तो नहीं चाहकर भी उनकी आँखें श्रीकृष्ण को देखने के लिए व्याकुल हो जाती है। राधा का चित चलायमान हो जाता है। राधा अपने हृदय को रोक नहीं पाती है। ऐसा लगता है कि वे चित्त विहीन हो गए हैं। इसलिए श्रीकृष्ण के चितचोर कहा गया है।

Q8. सवैये में कवि की कैसी आकांक्षा प्रकट होती है? भावार्थ बताते हुए स्पष्ट करें।

उत्तर :- सवैये में कवि रसखान आकांक्षा प्रकट करते हैं कि यदि श्रीकृष्ण की ओ लाठी और कंबल मिले जिसे लेकर वे गाये चराते थे तो उसके लिए वे तीनों लोकों को सुखों को त्याग सकते हैं। नंद बाबा की गायें चराने में जो उन्हें सुख की अनुभूति होती है के आठों श्री धि और नौवों निधि में भी प्राप्त नहीं होती है। श्रीकृष्ण के कुंजरबाग पर वे करोड़ों इन्द्रलोक के सुखों को त्याग सकते है ।

Q9. मन पावन, चितचोर, पलक ओट नहिं करि सके ।

उत्तर :- प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि रसखान द्वारा रचित प्रेम अयनि श्री राधिका’ कविता से ली गई है। इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह बताना चाहते हैं कि राधिका जब श्री कृष्ण के प्रति आकर्षित हो जाती है तो एक पल भी उनके बिना छिपकर नहीं रह पाती है। लगता है उनके पवित्र मन को श्री कृष्ण चुरा लिए हैं।

Q10. कवि प्रेम मार्ग को ‘अति सुधी’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है?

उत्तर :- कवित धनानंद प्रेममार्ग को अति सुधो कहता है क्योंकि इसमें छल कपट, ईर्ष्या, द्वेष आदि का भाव नहीं होता है। लोग का कोई स्थान नहीं होता है। त्याग ही प्रेममार्ग की सबसे बड़ी विशेषता है, त्याग के बिना प्रेम असफल होता है।

Q11. पराहित के लिए बादल ही देह कौन धारण करता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :- पराहित के लिए बादल, वृक्ष और साधु देह धारण करते है। इस सबों का जीवन दूसरों के लिए होता है। बादलों को बरसने के पीछे कोई अपना स्वार्थ नहीं होता कोई चाहत नहीं होती है।

Q12. कवि कहाँ अपने आँसूओं को पहुंचाना चाहता है और क्यों

उत्तर :- कवि धनानंद अपने आँसूओं को प्रेमिका सुजान के जान की रक्षा हेतु जिसके प्रदेस रूपी आँगन में पहुँचाना चाहता है। ताकि सुजान का हृदय अत्यंत पवित्र प्रेमभाव से तृप्त हो जाय।

Q13. कवि को भारत में भारतीयता क्यों नहीं दिखाई पड़ती है?

उत्तर :- कवि प्रेमधन जी देश की भक्ति भावना से ओत प्रोत हैं ये सम्पूर्ण भारत में भारतीय परंपरा संस्कृति आदर्श और रीति रिवाज एवं देशी हिन्दुस्तान में हिन्दुस्तानी भाषा काल काल देखना चाहते हैं. परंतु ऐसा व्यवहारिकता में नहीं मिलता है। इसलिए कवि को भारत में भारतीयता नहीं दिखाई पड़ती है।

Q14. कवि समाज के किस वर्ग की आलोचना करता है औऱ कियो ?

उतर :- कवि समाज के शिक्षित वर्मा की आलोचना करता है क्योंकि शिक्षित वर्ग है। यदि भारतीय को प्राप्त करेंगे। भारतीय चाल हाल सस्कृति को अपनाएँगे तो सभी उनका अनुसरण उनके हुए सामाजिक रूप रेखा अपनाने के लिए आगे आएँगे।

Q15. नेताओं के बारे में कवि की क्या राय है ?

उत्तर :- नेताओं के बारे में कवि की राय है कि भारतीयनेता देश की स्थिति और नियति को सुधारने में विफल ही देश के प्रबंध करने में इनकी धोती ढीली हो जाती है, क्योंकि भारतीय नेता को कल्पना से ग्रसित है।

Q16. कवि ने डफाली किये कहा है और क्यों?

उत्तर :- कवि ने डफाली उनलोगों को कहा है वासवृत्ति की चाह है। ये लोग दूसरे देशों में जाकर खुशामद करते हैं और झूठी प्रशंसा करते हैं तो ऐसे लोगों को कवि इफली कहा है।

Q17. मनुज भारती देखि कोल सकत नहीं पहिचान।

उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति प्रेमधन द्वारा रचित स्वदेशी कविता से ली गई है कवि इस पंक्ति के माध्यम से स्पष्ट करना चाहते हैं कि भारतीयों की स्थिति चाल – दाल रीतिरिवाज ऐसी हो गई है देखकर कोई नहीं पहचान सकता है कि ये सभी भारतीय है अर्थात् भारतीय अपनी से हटकर विदेशी रीति रिवाज से जुटते जा रहे हैं।

Q18. भारतमाता अपने ही घर में प्रवासिनी क्यों बनी हुई हैं?

उत्तर :- भारतमाता अंग्रेजों के नापाक शासन व्यवस्था से ग्रसित है गुलाम भारत में भारतीयों को कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। कुशासन, अत्याचार एवं दमनकारी प्रवृति छाई हुई है। जिसके कारण आज ऐसा प्रतीत होता है कि भारतमाता अपनी ही घर में प्रवासिनी बनी हुई है।

Q19. कविता में कवि भारतवासियों का कैसा चित्र खींचता है?

उत्तर :- भारतमाता कविता में छायावादी युग के को पताजी पराधिन भारत का चित्र खींचा है। उन्होंने स्पष्ट किया है फिल्टर भारत मुलामी के बेडिया में आएकी वीनस उस समय देश की आबादी 30 करोड़ थी। आमलोगों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। गुलामी के कुचकर में पड़कर भारतीय नग्न, अर्द्धनग्न भूर्खे, शोषित जीवन जीने के लिए बाध्य थे।

Q20. कवि भारतमाता को गीता प्रकाशिनी मानकर भी ज्ञानमूढ़ क्यों कहता है?

उत्तर :- कवि पंत जी भारतमाता को गीता प्रकाशिनी मानकर भी ज्ञानमूढ़ कहती है सम्पूर्ण जगत को ज्ञान का पाठ पढ़ाया है जगत गुरु कहलाया है, गीता का उपदेश सम्पूर्ण संसार को संदेश के रूप में दिया है, परंतु उसी गीता प्रकाशिनी भारतमाता पर अंग्रेजों का नापाक शासन व्यवस्था कायम होगी। जिसके कारण भारतीय असभ्य, शीर्षित, दलित, हिनता खिन्नता और भिन्नता का शिकार हुए फलतः इसे ज्ञानमूद कहा गया है।

Q21. कवि की दृष्टि में आज भारतमाता का तपसंयम क्यों सफल है?

उत्तर :- कवि की दृष्टि में आज भारतमाता का तपसंयम सफल है, क्योंकि भारतमाता सत्य और अहिंसा पर चलकर अपने संपदा को खो दिया सबकुछ खाकर भी सत्य, धर्म, असिा के मार्ग से विचलित नहीं हुआ। आज भी संसार को अहिंसा का ही पाठ पढ़ाया जाता है।

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